Jeevan sathi se judai


अच्छा तो तुम जा रही हो पर लौट के कब आओगी 


कभी किसी के साथ ऐसा न हो कि विवाह की वर्षगांठ अकेले मनाना पड़े  बड़ा ही मुश्किलों का छड़ होता है वो जब किसी के जीवन में ऐसी दुखद घड़ी आती है 

सच कहा है किसी ने जिंदगी कभी किसी की राह नही देखती जब मौका मिले अपना रास्ता अलग चुन लेती हैं ।
और पीछे हजार वादों को तोड़ कर नए सफर को चल देती हैं मेरी मोहब्बत ने कभी ऐसे ही वादे किए थे । साथ जीवनभर निभाने के जब हम एक दूसरे के लिए बने और उस सफर में साथ चल पड़े पर पता ही नही चला कि इतना वक़्त इतनी जल्दी कैसे बीत गया और चलते - चलते अचानक ये रास्ते कब विपरीत हो गए । कभी अयोध्या जाकर राजा राम के महलों के साथ मे दर्शन किये और वो मांगा जो हर कोई अपनी जीवन साथी के लिए मांगता है । पर देने वाला ईश्वर है वो पहले ही तय कर लेता है कि कब किसे कितना और क्या देना है । जिन्दगी में शायद दुख बहुत कम लोगों को नसीब होते है तो उनकी लिस्ट में मेरा नाम भी शामिल हो गया । 



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